राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर के विकास और संरक्षण में मीडिया की भूमिका.

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इंदिरा खरे
14/01/2026
( 29/01/2026 अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर National Media Foundation, New Delhi के द्वारा जयपुर में आयोजित सेमिनार हेतु यह लेख प्रस्तुत है. Released on 29 जनवरी 2026.)

ऐतिहासिक धरोहर के विकास और संरक्षण के पीछे आखिर क्या उद्देश्य होना चाहिए,इसके लिए हमारे विचार हमारी सोच सीधे भावी पीढ़ीयों की ओर केंद्रित हो जाती हैं. उनके लिए ऐतिहासिक धरोहरों की अमूल्य सम्पत्तियों को संरक्षित करना एवं मरम्मत कर या रिस्टोरेशन कर उनका विकास करना ही लक्ष्य होना चाहिए.

इसके अलावा ऐतिहासिक स्थल
हमारे अतीत और प्रथाओं पर विचार करने में मददगार होते हैं. इनकी सांस्कृतिक विरासत आम जन को जागरूक भी करते हैं.

पर्यटकों द्वारा संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में होती है मीडिया की भूमिका :–

राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण इसीलिए भी ज़रूरी है क्योंकि ये हमारी संस्कृति की आधारशिला हैं. इसीलिए इनका संरक्षण भी इनका अधिकार है.
7 अक्टूबर 2022 को राजस्थान राज्य के पर्यटन मंत्री ने इन्वेस्टमेंट समिट के आयोजन के दौरान एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में मीडिया की भूमिका पर ज़ोर डालते हुए कहा कि सितम्बर 22 में 18 लाख डोमेस्टिक टूरिस्ट्स ने राजस्थान का रुख किया जो कि 2 वर्ष पहले कोविड के कारण बिलकुल ख़त्म हो चुका था. ये सब मीडिया कि वजह से ही संभव हुआ. जितना मीडिया का सहयोग होगा उतना ही आप लोगों की कृपा होगी.”

ऐतिहासिक राज्य राजस्थान के धरोहर को अच्छी स्थिति में रखना मीडिया द्वारा सरकारी मशीनरी एवं पर्यटकों को जागरूक करने से ही संभव है, अब सोशल मीडिया एवं डिजिटल मीडिया का वक्त चल रहा है जिसमें नामी गिरामी स्थलों को सुरक्षित रखने के सन्देश भेजना और प्राप्त करना आम बात हो गईं है.
बात करते हैं सोशल मीडिया की भूमिका धरोहरों के विकास के लिए
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राजस्थान में लगभग 9 ऐतिहासिक धरोहर हैं जिनके विकास पर सरकार पूरा पूरा ध्यान देती है और इनके विकास के लिए मीडिया को अपनी भूमिका निभाने का अवसर भी देती है. धरोहरों का विकास मतलब उनके स्तर में सुधार गुणवत्ता के लिहाज से. यह तब ही सम्भव है जब मीडिया जनजाग्रति से सरकारी मशीनरी का दरवाज़ा खटखटाए. यही बात संरक्षण में भी लागू होती है.

जब किसी भी कारण से ऐतिहासिक धरोहर को कोई नुकसान पंहुचाता है अथवा जलवायु एवं मौसम के बदलाव से धरोहर को नुकसान होता है ऐसे वक्त में पहले विकास और फिर संरक्षण की उसे ज़रूरत होती है

कुल मिलाकर संरक्षण और विकास एक तरफ़ा सम्भव नहीं है सरकार पर दबाव बनाना और इन्हे सुरक्षित रखने के लिए जनता में जागृति लाना खास कर जब वे पर्यटक होते हैं, तब सिर्फ मीडिया की अपनी भूमिका से ही सम्भव है।

सोशल मीडिया के स्मार्ट प्लेटफॉर्म में सभी पारम्परिक मीडिया के डिजिटल रूप उपलब्ध होते हैं. जिसकी वजह से प्रिंट रेडिओ टेलीविसन इत्यादि के लिए घर अथवा ऑफिस में उपस्थित होना ज़रूरी नही होता। इन्ही सुविधाओं की वजह से आज का मीडिया सबके हाथों में है पर जर्नलिस्टिक मीडिया मेन की बुद्धि से ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और विकास हो रहा है