एम पी बजट 2026-27 , ग्रामीणो से भरे 54903 ग्रामों के लिए बजट में हिस्सेदारी काफी नहीं

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19/2/2026
इंदिरा खरे

पूरे बजट का 34% केवल ग्रामीण विकास के लिए दिया गया है, ऐसा हमारे मध्यप्रदेश के फाइनेंस मिनिस्टर श्री जगदीश देवड़ा जी ने बताया .इस आर्थिक अंश का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, क़ृषि और स्व सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के अवसर बढ़ाना है. मध्यप्रदेश के वाणिज्य मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कल विधानसभा में रु. 4 हज़ार 38 लाख करोड़ का बजट पेश किया जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए रु 40 हज़ार 62 करोड़ का प्रावधान रखा गया है.

2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 54903 गांव हैं. जबकि टेक्स्टबुक डॉट कॉम के अनुसार 2025 के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में 50 हज़ार से ज्यादा गाँव हैं. एवं 23 हज़ार से अधिक ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं।जानकारी के लिए बता दें कि सबसे बड़ा गाँव लालारिया बैरसिया तहसील में हैं और मध्यप्रदेश का सबसे छोटा गांव छिंदवाड़ा जिले में देवगढ़ माना जाता है. जहाँ जनसंख्या 1000 से कम है.यह अपने आप में बहुत खूबसूरत है इसे देश के पर्यटन मंत्रालय ने देश का सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म विलेज 28 सितम्बर 2024 को अवार्ड मिला है.
यह बजट ग्रामीण विकास पर केंद्रित है. जहाँ महिला स्व सहायता समूह की 50 हज़ार से अधिक बहने आजीविका मिशन के तहत प्राकृतिक खेती में सक्रिय है.वहीं सड़क पानी बिजली और आवास जैसे मूलभूत सुविधाओं के सुधार पर जोर दिया जाना है, यह बजट क़ृषि को सशक्त करने और ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वहां की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विकास का ध्यान रक्खा गया हैं.राज्य में 43 रूरल मार्ट, ग्रामीण एक्सप्रेस योजना में ई रिक्शा का संचालन जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं.
कुटीर एवं ग्रामोद्योग के लिए रु 145 करोड़ का बजट में प्रावधान है.ये विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए कार्य करता है. क़ृषि आधारित एम एस एम ई उद्योग, डेरी खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प, जैविक खेती, पशुपालन एवं हस्तशिल्प भी एम एस एम ई में कवर होते हैं. ये उद्योग लगभग 51% से अधिक रोजगार पैदा करते हैं.सरकार के इस बजट में ग्रामीण शहरी प्रवास को कम करने का भी प्रावधान है.
आदिवासी क्षेत्र की बात करें तो 11 277गांव के विकास के लिए रु 793 करोड़ और शहर से जोड़ने के लिए रु 21630 करोड़ का प्रावधान है.

उद्योगों की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है मगर कहीं भी ग्रामीण क्षेत्र में स्कूलों का विकास एवं उसमे पढ़ने वाले बच्चों की आवश्यकताओं पर विशेष जोर नहीं दिया गया है.
ग्रामीण विकास में कार्य करने वालों की तनख्वाह का भी महत्व है.कुल मिलाकर सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बहुत कम खर्च करने वाली है खर्च