मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेज में लगातार तीसरे वर्ष सीटें खाली

0
303

भोपाल
इंदिरा खरे
3/10/25

मध्यप्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को कर दिया बर्बाद, लगातार तीसरे वर्ष सीटें खाली*

2025-26 सत्र में नर्सिंग कालेजों की 70 प्रतिशत सीटों पर ही हुए रजिस्ट्रेशन , 28560 सीटे लेकिन रजिस्ट्रेशन सिर्फ 17735 सीटों पर ही हुए ।

ये है नया नर्सिंग कॉलेज घोटाला –
*मध्यप्रदेश की नर्सिंग शिक्षा से छात्र छात्राओं का मोहभंग

इस सत्र में भी 50 फीसदी सीटे रहेगी खाली

भोपाल – मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले और सरकार की लापरवाही ने प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को चौपट कर दिया है। कभी नर्सिंग शिक्षा के लिए पूरे देश में पहचान बनाने वाला मध्यप्रदेश आज अविश्वास और भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है।

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि भाजपा सरकार और नर्सिंग काउंसिल की नाकामी की वजह से वर्ष 2023-24 का सत्र शून्य ईयर घोषित करना पड़ा था। 2024-25 सत्र में 70% सीटें खाली रह गई थीं और अब 2025-26 सत्र में भी यही शर्मनाक स्थिति दोहराई गई है। छात्रों का मध्यप्रदेश की नर्सिंग शिक्षा से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है मध्यप्रदेश में 2025-26 सत्र 21 में से सिर्फ 8 शासकीय नर्सिंग को मान्यता मिली हैं वहीं प्राइवेट कालेजों को बीएससी नर्सिंग के 196 कालेजों और जीएनएम नर्सिंग के 247 कालेजों को मान्यता मिली हैं शासकीय और प्राइवेट कालेजों की बीएससी नर्सिंग , जीएनएम नर्सिंग , एमएससी नर्सिंग , पोस्ट बीएससी नर्सिंग की कुल सीटें मिलाकर 28,560 हैं लेकिन रजिस्ट्रेशन सिर्फ 17,735 सीटों पर ही हुए ।

वर्तमान सत्र 2025-26 के आंकड़े सरकार की नीतियों की पोल खोलते हैं –

बीएससी नर्सिंग व जीएनएम नर्सिंग : कुल 23,174 सीटें → सिर्फ 14,722 रजिस्ट्रेशन

पोस्ट बीएससी नर्सिंग : कुल 3,610 सीटें → सिर्फ 1,539 रजिस्ट्रेशन

एमएससी नर्सिंग : कुल 1,776 सीटें → सिर्फ 1,474 रजिस्ट्रेशन

रवि परमार ने कहा कि इनमें भी आधे से ज्यादा छात्र केवल शासकीय नर्सिंग कॉलेजों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि निजी कॉलेजों की साख पूरी तरह खत्म हो चुकी है। यह स्थिति साबित करती है कि भाजपा सरकार ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है और शिक्षा को व्यापार बना दिया है।

एनएसयूआई द्वारा शासकीय नर्सिंग कॉलेजों द्वारा किए गए गलत आवेदन की 18 अगस्त को विस्तृत शिकायत कर 27 अगस्त को पत्रकारवार्ता के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा विभाग और सरकार को चेताया था सभी शासकीय नर्सिंग कॉलेजों द्वारा नियम अनुसार आवेदन नहीं किया हैं लेकिन उसके बाद भी त्रुटियों में सुधार नहीं किया गया जिससे स्पष्ट हैं कि सरकार सरकारी नर्सिंग कालेजों को बंद कर प्रदेश के छात्र छात्राओं को दोगुनी फीस पर प्राइवेट कालेजों में प्रवेश लेने पर मजबूर कर रही हैं कहीं ना कहीं सको लेकर छात्र छात्राओं में आक्रोश व्याप्त हैं ‌।

परमार ने कहा कि नर्सिंग में प्रवेश कम होने की सबसे बड़ी वजह मध्यप्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का खुलना और वर्तमान में भी इनका संचालित होना है। नर्सिंग माफियाओं के इशारे पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी काम करते हैं और नामांकन से लेकर परीक्षा तक की पूरी प्रक्रिया नर्सिंग माफिया के अनुसार होती है। यही कारण है कि मप्र में चार साल की डिग्री पूरी करने में छात्रों को आठ साल लग रहे हैं।

जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि सरकार ने तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में योग्य नर्सिंग प्रोफेशनल्स की भारी कमी हो जाएगी। एनएसयूआई चेतावनी देती है कि भाजपा सरकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और छात्र-छात्राओं के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। ——
रवि परमार