अहिल्याबाई होळकर (31 मई 1725 – 13 अगस्त 1795), मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी तथा इतिहास-प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खण्डेराव की धर्मपत्नी थीं।
1767 में, पेशवा ने अहिल्याबाई को मालवा पर अधिकार करने की अनुमति दे दी। 11 दिसंबर 1767 को वे गद्दी पर बैठीं और इंदौर की शासक बनीं। अगले 28 वर्षों तक महारानी अहिल्याबाई ने न्यायोचित, बुद्धिमत्तापूर्ण और ज्ञानपूर्वक तरीके से मालवा पर शासन किया। अहिल्याबाई के शासन के तहत, मालवा में शांति, समृद्धि और स्थिरता बनी रही।
अहिल्याबाई होल्कर का शासन मुख्य रूप से मालवा क्षेत्र में फैला हुआ था, जिसकी राजधानी महेश्वर थी। उनका साम्राज्य उत्तर में चंबल नदी से लेकर दक्षिण में कृष्णा नदी तक और पूर्व में भोपाल से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला था. उन्होंने अपने राज्य में न्याय, शांति और समृद्धि स्थापित की.
अहिल्याबाई होल्कर ने 1767 से 1795 तक होलकर वंश की शासक के रूप में शासन किया. उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया और अपने राज्य के लोगों के कल्याण के लिए कई काम किए. उन्होंने न्याय, प्रशासन और परोपकारी कार्यों में उत्कृष्ट कार्य किया, जिसके कारण उन्हें “पुण्यश्लोक” की उपाधि मिली.
उनके शासनकाल में, मालवा क्षेत्र में शांति और समृद्धि थी. उन्होंने मंदिरों, घाटों, कुओं, तालाबों और विश्राम गृहों का निर्माण करवाया. उन्होंने 1780 में काशी विश्वनाथ मंदिर का भी जीर्णोद्धार करवाया. अहिल्याबाई एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी नेता थीं, जिन्होंने अपने राज्य के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास किए.
