नियुक्ति पत्र लेंगे या गोली खाएंगे, 29 से भोपाल में आमरण अनशन पर बैठेंगे

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इंदौर ।एमपी पीएससी चयनीत सहायक प्राध्यापक मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कराने और नियुक्ति देने के  लिए भोपाल के लिए पैदल निकल पड़े हैं।महू में संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर की प्रतिमा पर मुंडन कराने केसाथ शपथ ली है कि या तो नियुक्ति पत्र लेंगे या गोली खाएंगे।29 नवंबर को भोपाल पहुंचने के बाद ढाई हजार से अधिक सहायक प्राध्यापक आमरण अनशन पर बैठेंगे, अनशन से तभी उठेंगे जब सरकार नियुक्ति पत्र देगी। हालांकि उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने एक बार फिर दोहराया है कि इनके नियुक्त पत्र शीघ्र जारी करेगी सरकार। 

सैंकड़ों चयनीत प्राध्यापकों में से 50-50 का जत्था हर प्रमुख यात्रा केंद्र पर मुंडन कराते चल रहा है।मुंडन कराने के साथ ही ये लोग रास्ते भर भीख मांगते जा रहे हैं। महू के बाद इंदौर, देवास, सोनकच्छ में मुंडन करा चुके हैं।आगे आष्टा, सीहोर, बैरागढ़ में भी मुंडन का यह क्रम जारी रहेगा।भोपाल में आमरण स्थल पर करीब 700 चयनीत महिला सहा प्राध्यापक भी पहुंचेंगी। ये सभी सामूहिक मुंडन कराएंगी।सरकार पर आदेश का पालन कराने का दबाव बनाने के लिए निकली इस पदयात्रा को प्रांतीय प्राध्यापक संघ ,जयस, अजाक्स और आकाश सहित 17  संगठनों का समर्थन मिल चुका है ।

यह कारण है आंदोलन के लिए बाध्य होने का 

 सहायक प्राध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. प्रकाश खातरकर ने 'प्रजातंत्र' को बताया  एमपी पीएससी 2700 से अधिक सहायक प्राध्यापकों का चयन कर चुकी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इनके सत्यापन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है किंतु 15 माह बाद भी उच्च शिक्षा विभाग इन युवकों की पदस्थापना नहीं कर सका है। बड़ी संख्या में चयनित युवा  समाज के कमजोर तबकों से आने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने  सरकार से बड़ी उम्मीद लगा रखी थी, सरकार से भरोसा उठने पर यह कदम उठाना पड़ा है। 

अभी एडहॉक पर पढ़ा रहे हैं 4500 

प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में बिना पीएचडी, नेट, पीएससी परीक्षा पास किए करीब 4500 अतिथि विद्वान जब दिग्विजय सिंह सीएम थे तब से संविदा आधार पर पढ़ा रहे हैं।जबकि सहायक प्राध्यापक के लिए पीएचडी या एमपी पीएससी कक्लियर करना अनिवार्य है। ये परीक्षा पास करने वालों को नियुक्ति में वरीयता रहेगी।इन अतिथि विद्वानों द्वारा ही अपनी नौकरी बचाने के लिए हर बार उच्च न्यायालय में अपनी आपत्ति दर्ज कराई जाती रही। 2018 में मप्र उच्च न्यायालय ने 2750 पीएससी चयनित सहायक प्राध्यापकों के पक्ष में फैसला देते हुए 17 जून 18 को सरकार को इनकी नियुक्त के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने के विरोध में इन 2700 युवकों ने 16 जनवरी, 9 जून, और 1 अगस्त 2019 भोपाल में प्रदर्शन भी किया। 

'बाकी पदों पर अतिथि शिक्षक पढ़ाएं आपत्ति नहीं लेकिन सरकार हमें नियुक्ति तो दे'

संघ के महासचिव हितेश वाणी का कहना है अभी जो संविदा पर 4500 युवक पढ़ा रहे हैं उनमें से करीब 1200 तो पीएससी में चयनीत हो चुके हैं।शेष 1500 पदों पर ही नियुक्त आदेश जारी किया जाना है। शेष पदों पर अतिथि शिक्षक पढ़ाएं भी तो हमें आपत्ति नहीं लेकिन डेढ़ साल से हमें अपने हक से वंचित रखा जा रहा है।संघ उपाध्यक्ष हरिशंकर कसाना का कहना है आमरण अनशन से अब नियुक्त पत्र लेने के बाद ही उठेंगे। पुलिस ने ज्यादती की तो गोली खाने को भी तैयार हैं। डॉ अनिता तिवारी कहती हैं 29 को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से चयनित महिला सहायक प्राध्यापक भी पहुंच रही हैं। हम सब भी सरकार के अड़ियल रवैये के विरुद्ध सामूहिक मुंडन कराएंगी।