अयोध्या में राम मंदिर से चंदा चोरी मामला और नये महासचिव का चुनाव..
रिपोर्ट : इंदिरा खरे
यदि कहीं किसी प्रशासनिक कार्य में कोई घोटाला हो जाए, या कुछ नियम विरुद्ध घाट जाए तो एक न एक परफेक्ट व्यक्ति की या यूँ कहें सच्चे व्यक्ति की तलाश तुरंत हो जाती है. या सबसे सक्रिय व्यक्ति लोगों के ज़हन में आ ही जाता है. हम बात कर रहे हैं कृष्ण मोहन की जो एक ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं और अब सेवानिवृत हैं.अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के बाद उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास मे अंतरिम महासचिव की ज़िम्मेदारी दी जा रही है.आगामी 22 जुलाई को न्यास की बैठक मे यह अंतिम रूप से तय होना हैं. समाचारों के अनुसार 73 वर्षीय कृष्ण मोहन प्रशासनिक चरित्र के धनी और भारतीय वन सेवा (महाराष्ट्र)के सेवानिवृत अधिकारी हैं. वे सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद यू पी के हरदोई जिले में समाज सेवा में व्यस्त हैं.चंदा चोरी मामले से पहले चंपत राय न्यास के महासचिव थे.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास में चंदा चोरी मामले की पुलिस में अधिकारिक रिपोर्ट दर्ज़ कराने वाले कृष्णमोहन ही हैं. मंदिर न्यास में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय स्वम् सेवक संघ के साथ काम किया था. अंग्रेजी दैनिक इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार कृष्ण मोहन सितम्बर 2025 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के न्यासी बने जब कामेश्वर चौपाल जी का स्वर्गवास हो गया था. तब से वे न्यास का प्रशासन संभाल रहे हैं. जिन्हे अब न्यास में अंतरिम महासचिव की ज़िम्मेदारी भी सौंप दी गई है.
इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट के अनुसार कृष्णमोहन प्रशासनिक खामियों को दूर करना चाहते हैं और जनता का विश्वास बहाल करना चाहते हैं उनका कहना हैं कि भविष्य में दान पारदर्शी तरीके से दर्ज़ किये जाएंगे. इसी तरह एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार की रिपोर्ट बताती हैं कि कृष्णमोहन ने मीडिया से अनुरोध किया हैं कि वे सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें और अधिकारिक अपडेट के लिए अधिकृत प्रतिनिधियों से संपर्क करें.
चंदा घोटाले की जानकारी हम सब को हो चुकी हैं फिर भी यह बताना जरूरी होगा कि अयोध्या में 27 अप्रैल 2026 से लेकर 5 जून 2026 के बीच मिले सी सी टी वी फूटेज में कर्मचारियों द्वारा चंदा चोरी करते हुए प्रमाण मिले हैं इन 40 दिनों की रिपोर्ट्स ने पूरे प्रशासन को हिला दिया और इस खबर से जनता का न्यास से भरोसा गायब हो गया. फिर दान वीरों की क्या बात करें, जिनके दान का पैसा चोरी हुआ उन्होंने तो श्री राम मंदिर के लिए दान किया था.
चढ़ावा चोरी के मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच दल एस आई टी ने उपरयुक्त जानकारी दीं है.रिपोर्ट के अनुसार 70 बार चोरी के सबूत मिले.
